भंवरासा बांध से जुड़ेगी हरिशचन्द्र सागर नगर और कनवास के गांव

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सांसद ओम बिरला के साथ विधायक हीरालाल नागर ने की केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती

से मुलाकात, समस्या बताई तो मिला आश्वासन

न्यूज चक्र @ कोटा

कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला व सांगोद विधायक हीरालाल नागर ने बुधवार को देश की जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान इन्होंने उमा भारती से कालीसिंध नदी पर स्थित भंवरासा बांध से हरिशचन्द्र सागर नहर व कनवास तहसील के गांवों को जोड़ने की मांग की। उमा भारती ने पूरे हालात सुन कर उन्हें इस संबंध में शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।
नागर ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया कि कालीसिंध परियोजना के द्बितीय चरण के क्रियान्विति की घोषणा की गई है। वर्तमान परियोजना रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के द्बितीय चरण में सिंचाई के लिए बांध से तीन नहरें प्रस्तावित हैं। इनसे कोटा जिले की कनवास तहसील तथा झालावाड़ जिले के झालरापाटन व असनावर तहसील के कुल 100 गांवों की 14250 हेक्टेयर भूमि में नवीन सिंचाई क्षेत्र सृजित किए जाने का प्रावधान है। मगर सांगोद क्षेत्र में विद्यमान हरीशचन्द सागर सिंचाई प्रणाली के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
सांगोद विधायक ने यह भी बताया कि प्र्रस्तावित कालीसिंध बहुउद्बेशीय सिंचाई परियोजना में वर्तमान में स्थित हरीशचन्द सागर सिंचाई परियोजना के लगभग 18 हजार हेक्टर सिंचित क्षेत्र के लिए किसी भी प्रकार का जल उपयोग प्रस्तावित नहीं है। हरीशचन्द्र सागर पिकअप वियर व फीडर केनाल का उपयोग करते हुए कनवास क्षेत्र के 10557 हेक्टर क्षेत्र में नए कमांड क्षेत्र विकसित करने का प्रावधान किया गया है। परियोजना रिपोर्ट में कनवास क्षेत्र में नए सिंचित क्षेत्र विकसित करने के लिए लगभग 457 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। विधायक ने बताया कि पूर्व में वर्ष 2007-2008 में तैयार की गई कालीसिंध परियोजना रिपोर्ट में नवीन सिंचाई क्षेत्र के सृजन के साथ हरीशचन्द सागर सिंचाई प्रणाली के लिए भी जल का प्रावधान था। बाद में थर्मल परियोजना के द्बितीय चरण आने के कारण वर्तमान परियोजना रिपोर्ट में हरीशचन्द सागर सिंचाई प्रणाली के प्रावधान को हटा दिया गया। वर्तमान में हरीशचन्द्र सागर परियोजना से खानपुर व सांगोद के लगभग 18000 हैक्टर क्षेत्र मे खरीफ मे सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन रबी के दौरान हरीशचन्द सागर परियोजना में पानी उपलब्ध नहीं होने से सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा है। इस कारण सम्पूर्ण क्षेत्र में रबी की सिंचाई प्रभावित होती है।
नागर ने कहा कालीसिंध परियोजना के द्बितीय चरण के क्रियान्वयन के बाद हरिशचन्द सागर प्रणाली में खरीफ मौसम में भी पानी की उपलब्धता बाधित रहने की आशंका है। अर्थात खरीफ मौसम (मानसून में) कालीसिंध परियोजना द्बारा बांध के भर जाने के बाद ही नदी में पानी छोड़ा जाना संभव होगा। इसके बाद ही हरिशचन्द सागर परियोजना में पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस प्रकार कालीसिंध परियोजना के द्बितीय चरण के क्रियान्वयन के बाद वर्तमान में सिंचित हरिशचन्द सागर परियोजना के सिंचित क्षेत्र मेंखरीफ मौसम में भी पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।
केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने यह पूरी समस्या जान कर विधायक नागर को आश्वस्त किया कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को केन्द्रीय योजना में शामिल कर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाएगी।