आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं-रिजवी

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barmer 2मुफ्ती ए थार के उर्स में उमड़े अकीदतमन्द

न्यूज चक्र @ बाड़मेर

इस्लाम का दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है। उलटा यह तो हर प्रकार के जुल्मों सितम का विरोध कर वतन परस्ती व इंसानियत का पैगाम देता है। इसमें कोई भी छोटा-बड़ा नहीं है। शेर ए हिन्द, मुफ्ती ए आजम राजस्थान शेर मोहम्मद खान रिजवी ने यह बात कही। वे दारूल उलूम अनवारे गोसिया के सालाना जलसे एवं मुफ्ती ए थार मुफ्ती वली मोहम्मद नायमी के उर्स में तकरीर कर रहे थ्ो। बड़े अकीदत व एतराम के साथ इसका आयोजन सेड़वा मैदान
में किया गया।
इस जलसे में रिजवी ने अपनी तकरीर से मोमिनों के दिलों में जोश पैदा कर दिया। हर तरफ से सुभान अल्लाह, सुभान अल्लाह की सदा सुनाई देने लगी। नबी के दिवाने झूम रहे थ्ो। इस मौके पर नारा ए तकबीर से पण्डाल गूंज उठा। शेर मोहम्मद खान ने आवाम से मुखातिब होते हुए कहा कि मेरे इस्लाम ने अमन का पैगाम दिया है। जो लोग जुल्म करते हैं और दहशतगर्दी कर इन्सान का खून बहाते हैं, उनका इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। इस्लाम तो वतन से मोहब्बत, पड़ोसी, गरीबों, मोहताजों, लाचारों की मदद करना सिखाता है। इसी का नाम इस्लाम हैं। उन्होंने कहा कि पैगम्बर इस्लाम के रास्ते में लोग कांटे बिछा देते थे। मगर नबी ने फरमाया मैं पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आया हूं। यह जुल्म करते रहें और मैं इन्हें माफ करता रहूं, यही मेरा इस्लाम है।
कौमी एकता पर बोलते हुए कहा पैगम्बरे इस्लाम ने अमन शान्ति का पैगाम
दिया। खान ने कहा कि अपने वतन से मोहब्बत करना ईमान का आधा हिस्सा है। हम सब आदम की औलाद हैं। हम में कोई छोटा या बड़ा नहीं, बड़ा वो है जो रब को ज्यादा याद करता है और गरीबों, मजलूमों की हमेशा मदद करता है। उन्होंने पैगाम दिया कि इन्सानियत, भाईचारे और अपने मुल्क के लिए हर वक्त कुर्बान होने का दिल में जज्बा पैदा करो।
पीर सैयद नुरुल्लाह शाह बुखारी ने अपनी तकरीर में कहा कि अल्लाह ने इन्सान की जरूरत के मुताबिक दुनिया की तमाम नैमतें बनाईं और बन्दे को सिर्फ अल्लाह की इबादत के लिए बनाया। इसलिए पांच वक्त नमाज पढेèं, गरीबों, बेसहारा लोगों की मदद करें। यही रास्ता जन्नत तक ले जाता है।
इस अवसर पर मौलाना ताज मोहम्मद, जिलानी जमात के चीफ खलीफा मौलाना सखी मोहम्मद कादरी, मौलाना अयूब अशरफी, मौलाना अली हसन, मौलान जान मोहम्मद, मौलाना बिलाल, मौलाना कमालुदीन, सैयद भूरेशाह, सैयद गुलाम शाह, सैयद मीठन शाह, मुस्लिम इंतेजामिया कमेटी के पूर्व सदर असरफ अली, हासम खां समेजा सिहार, एडवोकेट मुनवर अली आदि कई लोग मौजूद थे। मेहमानो का शुक्रिया दारूल उलूम के सदर अब्दुल मुस्तफा ने अदा किया।