धर्म से विमुख व्यक्ति पशु समान

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काष्र्णि विकास समिति की ओर से आयोजित हो रही भागवत कथा

न्यूज चक्र @ कोटा

कथावाचक राष्ट्रीय सन्त काष्र्णि बालयोगी महाराज ने कहा कि धर्म से बढèकर कुछ नहीं है। धर्म विहीन व्यक्ति पशु के समान होता है। धर्म ही व्यक्ति को संसार में अपना जीवन चक्र चलाना सिखाता है। महाराज काष्र्णि विकास सेवा समिति की ओर से विश्वकर्मा नगर स्थित चौथमाता मंदिर के पास आयोजित भागवत कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थ्ो।
उन्होंने आगे कहा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मक्षेत्र में धर्म और मर्यादा का पालन करते हुए आगे बढना चाहिए। धर्म से विरक्ति के कारण ही संसार में विभिन्न समयाओं का जन्म हुआ है। आज व्यक्ति धर्म को छोड़कर केवल धन के पीछे दौड़ रहा है। लेकिन धन से व्यक्ति का कल्याण होने वाला नहीं है। इस धन को तो संसार में ही छोड़कर जाना होगा। जब इस दुनिया से जाएगा तो धर्म ही पार लगाएगा। महाराज का कहना था कि धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं है, बल्कि व्यक्ति के जीने का सलीका भी धर्म ही है। धर्म को सूर्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य को पीठ दिखाकर केवल माया रूपी छाया को पकड़ना व्यर्थ है। पांडवों का उदाहरण देते हुए कहा कि समस्त प्रकार के दुख उठाने के बावजूद भी धर्म को नहीं छोड़ा तो आखिर में महाभारत में पांडवों की ही विजय हुई। उन्होंने सन्त को परिभाषित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति मन, वाणी और वचन से दूसरे का हित करता है, वही सही मायने में साधु होता है। केवल भगवा वस्त्र पहनने से ही कोई साधु नहीं होता है।
महाराज ने कहा कि दुनिया में वही व्यक्ति जगा हुआ है, जो सांसारिक मोह माया और आसक्तियों से दूर है। समस्त आसक्तियों से दूर होकर मन वैराग्य की ओर अग्रसर होता हुआ भगवान को पाने की इच्छा करने लगे तो समझो कि वह व्यक्ति जाग गया है। ईश्वर की महिमा का वर्णन करते हुए बालयोगी महाराज ने कहा कि वह निराकार है, ईश्वर से हम जो मांगते हैं, वह हमें नहीं देता है। बल्कि जिसकी हमें आवश्यकता होती है, वह हमें देता है।
समिति के प्रवक्ता लीलाधर मेहता ने बताया कि बालयोगी महाराज की प्रतिदिन शाम को 6 से रात्रि 1० बजे तक भागवत कथा आयोजित की जा रही है। विश्रान्ति आरती में कथा संयोजक तथा समिति के अध्यक्ष श्योजीलाल मीणा उपस्थित थे।