इतने पत्थर कहां से आए

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महापौर ने उठाए लाठीचार्ज की घटना पर सवाल

पुलिस की कार्यप्रणाली को बताया निराशाजनक

न्यूज चक्र @ कोटा

महापौर महेश विजयवर्गीय ने कव्वाली कार्यक्रम में हंगामें और लाठीचार्ज की घटना पर सवाल उठाए हैं। पुलिस की कार्य प्रणाली की निंदा करते हुए इसे निराशाजनक बताया। विजयवर्गीय ने पत्रकारों से बात करते हुए यह विचार रख्ो। उनका कहना था कि मेला समिति और नगर निगम की ओर से बेहतर कलाकारों को बुलाया गया था। बैठने की व्यवस्था से लेकर माइक व्यवस्था तक सब कुछ व्यवस्थित था। ऐसे में किसी भी प्रकार के हंगामें की गंुजाइश ही नहीं थी।

महापौर विजयवर्गीय सहित उप महापौर सुनीता व्यास, मेला समिति अध्यक्ष राम मोहन मित्रा, मेला समिति सदस्य नरेन्द्र हाड़ा, महेश गौतम लल्ली, पार्षद देवेन्द्र चौधरी मामा ने भी पत्रकारों से बात करते हुए हंगामे की घटना को सुनियोजित करार दिया। इन्होंने कहा कि मेला प्रांगण में विजयश्री रंगमंच के सामने सफाई करवाकर मेटिंग बिछाई गई है। आगे के स्थानों पर गद्दे भी बिछाए गए हैं। ऐसे में वहां इतनी मात्रा में पत्थर कहां से आए, यह भी जांच का विषय है।
महापौर ने कहा कि कुछ लोगों ने माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया और वे उसमें सफल रहे हैं। जबकि अधिकांश श्रोता कव्वाली का आनंद उठा रहे थे और कार्यक्रम को ऐसे ही सुनना चाहते थे। चंद लोगों ने पत्थर फेंके और बल्लियां उखाड़कर उत्पात मचाया। जहां दूर-दूर तक पत्थर नहीें थे, वहां बड़ी मात्रा में इनका पाया जाना चिंताजनक है। ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए मेले की सीसीटीवी व अन्य फुटेज पुलिस को सौंप दी गई है। आगे की जांच और कार्रवाई पुलिस को करनी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की व्यवस्थाएं त्रुटिपूर्ण रहने के कारण ही यह घटना हुई। पुलिस का जाप्ता गत वर्षों की अपेक्षा बहुत कम था। मंच के आसपास और सामने की सारी व्यवस्थाएं चंद होमगार्ड जवानों के हाथों मंे सौंप दी गई। पूरे मेले के दौरान पुलिस के बड़े अधिकारी भी नदारद रहे। असामाजिक तत्वों का हुड़दंग करीब 9 बजे ही प्रारंभ हो गया था। इसके बावजूद 11.30 बजे तक भी पुलिस की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में उत्पाती यदि मेले में घुस जाते और सप्ताहांत का दिन होता तो नुकसान अधिक हो सकता था।

उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज के समय चंद होमगार्ड और आरएसी के जवान मौजूद थे। जिनके पास न तो सुरक्षा उपकरण थे और न ही वे हेलमेट लगाए थे। सीआई भी बीच मेले मंे ही छुट्टी पर चले गए। पुलिस और मेला समिति के बीच कोई समन्वय बैठक नहीं हो पाई। इस प्रकार पुलिस अधिकारियों की कार्य प्रणाली सही नहीं रही। मेले में हुई इस घटना के संबंध में प्रकाशित समाचारों के कारण शुक्रवार को होने वाली सिने संध्या भी खटाई में पड़ते-पड़ते रह गई। गायक हिमेश रेशमिया ने आने से मना कर दिया था। उन्हंे पूर्ण सुरक्षा का विश्वास दिलाना पड़ा। तब जाकर वे राजी हुए।

दुकान माफिया तो नहीं बने कारण

मेला समिति व महापौर ने कहा कि मेले में दुकानों के स्पष्ट आवंटन के कारण ढाई गुना अधिक राजस्व की वसूली हुई है। पहले कुछ लोग 40-50 दुकानों का आवंटन करवा कर उन्हें ब्लैक करते थ्ो। मगर इस बार उन्हें यह मौका नहीं मिल सका। कहीं इस घटना के पीछे इन्हीं लोगों का हाथ तो नहीं था। इस बात की भी जांच होनी चाहिए।

मेले में बेखौफ आएं, अतिरिक्त पुलिस रहेगी मौजूद

महापौर विजयवर्गीय ने पत्रकारों को विश्वास दिलाया कि मेले में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए एसपी से बात की गई है। आगामी कार्यक्रम कवि सम्मेलन तथा समापन के अवसर पर किसी को भी असुविधा नहीं होगी। सुरक्षा के लिए एसपी, एएसपी, तीन डीएसपी और सिपाही मौजूद रहेंगे। महापौर ने सभी से बिना भय मेले का आंनद लेने की अपील की।