शराबबंदी के लिए अनशन कर रहे छाबड़ा की मौत से घिरी सरकार

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न्यूज चक्र @ जयपुर

राज्य में सम्पूर्ण शराबबंदी और मजबूत लोकायुक्त की मांग को लेकर 31 दिन से अनशन कर रहे बुजुर्ग गांधीवादी नेता गुरुशरण छाबड़ा की आज सुबह अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला शुरू हो गया है। एक ओर जहां इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर निशाना साधा तो भाजपा ने भी जोरदार पलटवार किया।

छाबड़ा की मृत्यु पर गहलोत ने मुख्यमंत्री वसुंधराराजे पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हठ पर नहीं अड़ी रह कर उनसे बात कर लेतीं तो यह हादसा नहीं होता। इस पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने गहलोत पर बेवजह राजनीति करने आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छाबड़ा ने राज्य में शराबबंदी और लोकायुक्त को सशक्त बनाने के लिए गहलोत के कार्यकाल में दो बार अनशन किया था।
यदि गहलोत उस समय उनकी बात मान लेते तो आज छाबड़ा की जान नहीं जाती। परनामी ने गहलोत और उनकी पूर्ववतीã सरकार को छाबड़ा की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। मुख्यमंत्री ने तो इस मामले में संवेदना दिखाते हुए छाबड़ा की 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति देकर क्रियान्विति कर दी थी। गहलोत ने तो अपने मुख्यमंत्रित्व काल में छाबड़ा की एक भी मांग नहीं मानी थी।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज को देहदान

1973 में जनता पार्टी से सूरतगढ़ विधायक चुने गए गुरुशरण छाबड़ा की देह को उनकी पूर्व घोषणा व परिजनों की इच्छा के अनुरूप एसएमएस मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया। छाबड़ा को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर पहुंचे चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी को विरोध का सामना करना पड़ा। छाबड़ा के निवास पर मौजूद उनके समर्थकों ने इनके खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि विरोध के बावजूद भी दोनों मंत्री वहां से नहीं गए।
छाबड़ा के परिजनों ने बताया कि वे शराबबंदी और सशक्त लोकायुक्त कानून की मांग पर 2०14 में सरकार के साथ हुए समझौते को लागू नहीं करनी से नाराज थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिह, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रतापसिह खाचरियावास आदि राजनीतिक हस्तियां भी उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके निवास पर पहुंचीं।
छाबड़ा के पुत्र गौरव और उनके समर्थकों ने छाबड़ा की देह एसएमएस मेडिकल कॉलेज को सौंपे जाने के लिए उसे रवाना किया।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दोनों मंत्रियों की मौजूदगी में छाबड़ा की देह को कॉलेज प्रशासन को सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान भी उनके समर्थकों ने मंत्रियों और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राज्य सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए छाबड़ा को शहीद का दर्जा दिए जाने और स्मारक बनाए जाने की मांग की। उनकी मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।