श्रीराम के जयकारों के साथ रावण और उसके कुनबे का दहन

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दशहरा मैदान लोगों से खचाखच भरा रहा

न्यूज @ चक्र कोटा
राज्य का सबसे बड़ा दशहरा मेला गुरुवार को यहां रावण और उसके कुनबे के पुतलों के दहन के साथ ही परवान पर चढ़ गया। इस नजारे को देखने के उत्सुक लोगों से मेला मैदान पूरी तरह खचाखच भर गया था। पुतलों का दहन शुरू होते ही मेला परिसर जय श्री राम और जय हनुमान के जोरदार उद्घोषों से गूंजने लगा। साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत पर दर्शक जोरदार तालियां भी बजा रहे थ्ो। हर चेहरे पर इस विजय का उल्लास भी साफ झलक रहा था।
शाम होने के साथ ही दशहरा मेला मैदान में लोगों का रैला उमड़ने लगा था। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। वे अपने बच्चों को भी साथ लेकर आईं थीं। दशहरा मेला मैदान की ओर आने वाली सड़कों को देखकर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पूरा शहर ही इस ओर उमड़ रहा हो। इस आयोजन में कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी, सांसद ओम बिरला, विधायक संदीप शर्मा व हीरालाल नागर अतिथि थे। रावण दहन के पहले अतिथियों ने पूजा अर्चना की। इस दौरान भगवान लक्ष्मी-नारायण की सवारी के विजयश्री रंगमंच परिसर में प्रवेश करते ही लोगों का उल्लास व रोमांच और बढ़ गया। पूर्व महाराज कुमार इज्येराज सिंह ने ज्वारा पूजन के बाद रियासतकालीन परम्परा के अनुसार प्रतीकात्मक राावण की नाभि में स्थित अमृत कलश को नष्ट करने के लिए तीर चलाया।

पहला धमाका कुंभकर्ण के पुतले में हुआ। इसी के साथ मैदान में मौजूद हजारों दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। इसके बाद क्रमश: मेघनाद व रावण के पुतलों का भी जोरदार आतिशबाजियों व धमाकों के साथ दहन हुआ। रावण के पुतले के दहन के समय तो लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। पुतलों से उठती आग की ऊंची-ऊंची लपटों ने हर ओर प्रभु की जीत की खुशी की चमक बिखेर दी।

इस अवसर पर महापौर महेश विजयवर्गीय, उपमहापौर सुनीता व्यास, मेला समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा, महेश गौतम लल्ली, नरेन्द्र सिंह हाड़ा, विनोद नायक, कृष्णमुरारी सामरिया, मीनाक्षी खण्डेलवाल, रमेश आहूजा, बृजमोहन गौड़, प्रकाश सैनी, पवन अग्रवाल आदि भी मौके पर मौजूद थे।

आतिाबाजी से रोान हुआ आसमान
रावण दहन के बाद हुई आकर्षक आतिशबाजी से आसामान जगमगा उठा। इस दौरान पूरे समय लोग असामान पर टकटकी लगाए देखते रहे। आतिशबाजियों के रूप में आसमान में कभी आशर्फियां बिखरती नजर आईं तो कभी मछलियां तैरती सी महसूस हुईं। कभी नीली तो कभी जामुनी तो कभी पीले रंग की छटा बिख्ोरती आतिाबाजियां भी बेहद आकर्षक रहीं। आतिशबाजी का यह कार्यक्रम अनवरत करीब आधे घंटे चला।

माण्ड गायकी पर मंत्रमुग्ध हुए र्दाक
रावण दहन से पूर्व विजयश्री रंगमंच पर विद्या कनाड़ा की मांड गायकी का आनंद भी दर्शकों ने लिया। विद्या ने ”केसरिया बालम…आओ नी पधारो म्म्हारे देस… से अतिथि सत्कार की हमारी परम्परा को निभाया। वहीं ”पंखी डुलाओ सारी रैन… म्हारा मीठा मारू याहीं रीझो जी… से देश में रह कर अपने पिता को कर्म करने के लिए प्रेरित करती पत्नी को दर्शाया गया। ”हेली नाव री, डाकिया कागद लिख दे, लिख परवाना मेरे साजन को…, याद थारी आई छाने छाने रोई…ढोला छोल मंजीरा बाजै रे…, जैसे लोकगीतों पर भी लोग झूमने लगे।