राजस्थान देश का पहला राज्य, जहां यह योजना लागू हुई। जानिए क्या है यह योजना…

न्यूज चक्र, कोटपूतली। आज राजस्थान की विकास योजनाओं के अध्याय में एक नया पन्ना जुड़ गया है। राजस्थान सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 103 वीं जयंती के अवसर पर इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना की शुरुआत की.

मुख्यमंत्री आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शुरू की गई इस योजना में गर्भवती महिलाओं को दूसरी संतान के अवसर पर भी वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है. राजस्थान सरकार की बजट घोषणा के अनुसार प्रदेश में दूसरी संतान पर भी अब 6000 की आर्थिक सहायता सरकार की ओर से महिलाओं को दी जाएगी. आज पीपीपी मोड पर 4 जिलों में इस योजना का आगाज हुआ.

राजस्थान देश का पहला राज्य

राजस्थान देश का पहला राज्य बना जहां दूसरी संतान के अवसर पर भी महिलाओं को आर्थिक सहयोग देने की पहल की गई है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से इस योजना को देश भर में लागू करने का आग्रह किया है.

इस योजना के अवसर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा वे हमेशा गरीबों के हित में काम करने वाली नेता रही है. राजस्थान सरकार ने भी उनके आदर्शों और सिद्धांतों के अनुरूप यह कदम उठाया है. अभी यह प्रोजेक्ट आदिवासी बेल्ट के लिए बनाया है. धीरे-धीरे इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा. सीएम ने प्रदेशवासियों से कोरोना जन जागरूकता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने और मास्क को अनिवार्य तौर पर लगाने की अपील भी की.

कार्यक्रम में महिला और बाल विकास विभाग मंत्री ममता भूपेश ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा प्रसव के दौरान मां को पोषण मिलेगा तभी बच्चा स्वस्थ पैदा होगा. इस आर्थिक सहायता के जरिए महिला अपनी संतान की देखभाल अच्छे ढंग से कर सकेगी. उन्होंने बताया कि इस योजना पर प्रतिवर्ष 43 करोड़ का खर्च आएगा, जिससे 77 हजार महिलाऐं लाभान्वित होंगी। राजस्थान सरकार की कोशिश है कि इस योजना के जरिए मातृशक्ति को सुरक्षा और सहारा मिले. परिवार नियोजन रहे, जनसंख्या नियंत्रण में रहे.


फिलहाल डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर व प्रतापगढ़ में लागू की गई यह योजना जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरू की जाएगी. योजना का शत प्रतिशत पैसा राज्य सरकार की ओर से वहन किया जा रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की यह पहल निश्चित तौर पर दूसरी संतान के समय निर्धन परिवार की महिलाओं के लिए बहुत बड़े सहारे का काम करेगी.

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