पंचायत चुनाव 2020: सोशल मीडिया सरपंची का सहारा

पंचायत चुनाव 2020: सोशल मीडिया सरपंची का सहारा

प्रथम चरण के पंचायत चुनाव 28 सितम्बर को, कोरोना के चलते दावेदार कर रहे जतन

न्यूज चक्र। जयपुर जिले की आंधी, फागी व किशनगढ़-रेनवाल पंचायत समिति के प्रथम चरण के पंचायत चुनाव 2020 को लेकर दावेदारों ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हर दावेदार अपने-अपने तरीके से सरपंची का सेहरा बांधने का जतन कर रहा है।

यहां तक कि अब तक गांव में, गांव के लोगों से खुद को बड़ा मानकर दूसरों से कन्नी काटते या दूरी बनाकर रहते नजर आते थे, वही अब सुबह पहले उठकर सभी को मोबाइल पर राम-राम करने लगे हैं।


वहीं चेहरे पर मास्क लगाए दावेदार घर-घर जाकर भी मतदाताओं के धोक लगा रहे हैं, और मान-मनुहार कर रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है वैसे ही सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव का तरीका भी बदलता जा रहा है। अबकी बार सरपंच व वार्ड पंच उम्मीदवार कोरोना संक्रमण के चलते सोशल मीडिया का ज्यादा सहारा ले रहे हैं।

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आपको बता दें कि जिले की नवसृजित आंधी, किशनगढ़-रेनवाल व पुरानी फागी में प्रथम चरण के चुनाव 28 सितम्बर को होने हैं। किशनगढ़ रेनवाल में 24 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 163 व वार्ड पंच के लिए 134 वार्ड में 324 उम्मीदवार मैदान में हैं।

वहीं, 102 वार्ड पंच निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। फागी पंचायत समिति की 20 ग्राम पंचायतों में 259 पंच व सरपंच पद के लिए 102 प्रत्याशी मैदान में हैं। जबकि 97 वार्ड पंच निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। यहां 28 सितम्बर को सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक मतदान होगा। आपको बता दें कि कोरोना के चलते मतदान के लिए 1 घंटा समय बढ़ाया गया है।

ग्रुप बनाकर मतदाताओं से मांग रहे वोट


ग्राउण्ड रिर्पोट की बात करें तो इस बार अधिकतर उम्मीदवार (पंचायत चुनाव) फेसबुक व वाट्सअप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए ग्राम पंचायत के मतदाताओं को जोड़कर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उम्मीदवार घर-घर जाकर संपर्क करने के साथ ही प्रत्येक परिवार से वाट्सअप नम्बर का ग्रुप बनाकर पंचायत के मतदाताओं से वोट मांग रहे हैं।


आपको बता दें कि कुछ दावेदार अपनी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा कर रहे हैं। तो कुछ सीवर, नाली, सड़क व स्वच्छ पानी घर-घर पहुंचाने का वादा भी कर रहे हैं। वहीं, अबकी बार भी सरपंच पद की दोवदार महिलाऐं भी सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राजनीति में उनकी भूमिका भी बढ़-बढ़कर गांवों में लोगों से सम्पर्क साधते देखी जा सकती है।

महिला दावेदार अपने पति व परिवार के साथ घर-घर जाकर लोगों से सम्पर्क कर विकास के वादे कर रही हैं। साथ ही बुजुर्गो से पांव छूकर जीत का आशीर्वाद ले रहीं।

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